DBLC IN HINDI

DBLC:-

DBLC का पूरा नाम data base life cycle है। DBLC में 6 stages/phases होते है। monitoring, maintenance तथा modification ये तीनों DBLC का हिस्सा होते है इसलिए ये life cycle लगातार चलती रहती है और कभी समाप्त नही होती है। इसमें निम्न stages होती है:-
1:- database initial study
2:-database design
3:-implementation and loading
4:-testing and evaluation
5:-operation
6:-maintenance, monitoring and modification.

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DBLC in hindi

1:-database initial study:- यह डेटाबेस का सबसे पहला और महत्वपूर्ण phase है। इस phase में designer कंपनी के भीतर मौजूदा सिस्टम के ऑपरेशन की जांच करता है और यह निर्धारित करता है कि क्यों और कैसे system विफल(fail) हुआ है। database initial study का उद्देश्य निम्न है:-
*कंपनी की स्थिति का विश्लेषण करना।
*समस्याओं और बाधाओं को परिभाषित करना।
*उद्देश्यों को परिभाषित करना।

2:-database design:- यह phase DBLC का सबसे critical phase होता है। इस phase में logical और physical दोनों प्रकार का design किया जाता है। logical design में conceptual model का निर्माण किया जाता है। एक conceptual model आमतौर पर E-R मॉडल होता है जो कि डेटाबेस के fields, tables और primary key को दर्शाता है और यह भी देखता है कि tables एक दूसरे से किस प्रकार सम्बंधित है।
physical design का सिर्फ एक goal होता है :”डेटाबेस की क्षमता को बढ़ाना।” अर्थात डेटाबेस की performance को बढ़ाना।

3:-Implementation and loading:- इस phase में e-r diagram में बनाई गयी tables को SQL statement में convert किया जाता है। इस stage में तीन steps होते है:-
*DBMS को install किया जाता है।
*डेटाबेस को create किया जाता है।
*डेटा को load और convert किया जाता है।

4:-testing and evaluation:- testing डेटाबेस की quality को ensure करता है। जिससे risk को कम किया जाता है। testing के first स्टेप में डेटाबेस को टेस्ट किया जाता है जिससे कि data की integrity और security को maintain किया जा सकें। database testing में हमें password security, data encryption आदि को check करने की आवश्यकता होती है।
जब डेटाबेस और एप्लीकेशन प्रोग्राम्स को create कर दिया जाता है तथा उसकी testing भी पूर्ण कर दी जाती है तब उनको evaluate(मूल्यांकित) किया जाता है।

5:-Operation:- जब डेटाबेस का evaluation कर दिया जाता है तब हम operational phase में आते है। इस phase का मुख्य उद्देश्य यह ensure करना है कि डेटाबेस तथा एप्लीकेशन प्रोग्राम्स fully functional हों तथा ये अपने पूर्ण जीवन काल अपना job अच्छी तरह करें।

6:-maintenance, monitoring and modification:- यह dblc का अंतिम phase है इस phase में database को maintain, monitor तथा modify किया जाता है।  जब सिस्टम बनके तैयार हो जाता है तथा यूजर उसका प्रयोग करना शुरू कर देते है तब जो problems उसमें आती है उनको time-to-time हल करना पड़ता है। user requirements के हिसाब से डेटाबेस को modify करना पड़ता है।इसमें डेटाबेस का backup लेना भी इसमें शामिल है।

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