what is SRS in hindi & characteristics of SRS in hindi

what is SRS and characteristics of SRS in hindi:-

SRS (SOFTWARE REQUIREMENT SPECIFICATION) in hindi:-

software requirement specification जो है वह किसी सिस्टम या सॉफ्टवेर एप्लीकेशन की जरूरतों का एक पूरा डॉक्यूमेंट या विवरण होता है.

अर्थात् दुसरे शब्दों में कहें तो, “SRS एक डॉक्यूमेंट होता है जो कि यह describe करता है कि सॉफ्टवेर के features क्या होंगें तथा उसका behaviour क्या होगा अर्थात् वह किस प्रकार परफॉर्म करेगा.”

SRS का फायदा यह है कि इससे developers को सॉफ्टवेर को विकसित करने में कम समय तथा मेहनत लगती है.

SRS जो है वह सॉफ्टवेर के layout की तरह होता है जिसकी यूजर समीक्षा कर सकता है तथा देख सकता है कि वह (SRS) उसकी जरूरतों के हिसाब से बना है या नहीं”

हमने software requirement specification के बारे में जान लिया कि वह क्या है अब उसकी विशेषताओं को पढ़ते है.

characteristics of SRS in hindi (विशेषताएं):- इस की विशेषताएं निम्नलिखित है:-

1:- accurate 2:- clear 3:- complete 4:- consistent 5:- verifiable 6:- modifiable 7:- traceable 8:- testable 9:- unambigous 10:-correct

1:- complete (संपूर्ण):- SRS जो है वह संपूर्ण होना चाहिए अर्थात् जो भी सॉफ्टवेयर की जरूरतें है वह सभी SRS में उल्लेखित होनी चाहिए.

2:- correct (उचित):– यह correct होना चाहिए अर्थात् जो कस्टमर की जरूरतें है उसके हिसाब होना चाहिए.

3:- clear (स्पष्ट):- यह स्पष्ट होना चाहिए. सॉफ्टवेयर की आवश्यकताओं को स्पष्ट रूप से वर्णित (declared) होना चाहिए.

4:- accurate (परिशुद्ध):- इसमें accuracy होनी चाहिए. अगर यह ही accurate नहीं होगा तो सॉफ्टवेयर का निर्माण नहीं हो सकता.

5:- consistent (निरंतर):- इसको शुरुवात से लेकर अंत तक consistent (निरंतर) होना चाहिए जिससे कि यूजर आसानी से रिक्वायरमेंट्स को समझ सकें. और consistency तभी प्राप्त की जा सकती है जब दो रिक्वायरमेंट्स के मध्य कोई विरोधाभास ना हो.

6:- verifiable (सत्यापनीय):- यह verifiable (सत्यापन योग्य) होना चाहिए. जो experts तथा testers होते है उनके द्वारा requirements को verify किया जाता है.

7:- modifiable (परिवर्त्य):- SRS का जो डॉक्यूमेंट होता है उसमें specify की गयी सारी रिक्वायरमेंट्स मॉडिफाई करने योग्य होनी चाहिये. यह तभी हो सकता है जब SRS का स्ट्रक्चर संतुलित हों.

8:- Traceable:- यह traceable होना चाहिए अर्थात् इसमें प्रत्येक requirement अलग अलग प्रकार से identify होनी चाहिए. प्रत्येक requirement की अपनी अलग एक पहचान होनी चाहिए.

9:- testable (परिक्षण योग्य):- यह testable होना चाहिए अर्थात् इसे किसी भी प्रकार से टेस्ट करने के योग्य होना चाहिए.

10:- unambigous (अमिश्रित):- यह केवल तब unambigous हो सकता है जब सभी requirement का केवल एक ही अर्थ हों. अर्थात् केवल एक ही interpretation (व्याख्या) हो.

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