leadership क्या है तथा इसके प्रकार क्या है?

इस पोस्ट में हम leadership (नेतृत्व) के बारें में विस्तार से पढेंगे.

what is Leadership in hindi (नेतृत्व का अर्थ एवम् परिभाषा)

कोई सामाजिक समूह कितना भी छोटा बड़ा क्यों न हो, उसका संगठन कुछ उद्देश्यों को सामने रखकर किया जाता है. इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए संगठन को एक विशेष प्रकार से कार्य करना होता है. किसी संगठन को विशेष प्रकार से कार्य करने की ओर ले जाना, उसके कार्यों को सही दिशा देने और संगठन पर नियंत्रण रखने वाले व्यक्ति को नेता (leader) और संगठन में उसकी भूमिका (कार्य को पूरा करने की प्रक्रिया) को नेतृत्व (leadership) कहते है.

भिन्न भिन्न विद्वानों ने इसे भिन्न भिन्न रूप से परिभाषित किया है.

  1. कुंटज और ओ डोनेल की परिभाषा

“नेतृत्व किसी उद्देश्य की प्राप्ति हेतु, संदेश द्वारा व्यक्तियों को प्रभावित करने की योग्यता है,”
(leadership is the ability to exert inter-personal influence by means of communication towards the achievement of the goal.)

  1. काटज और काहं की परिभाषा

नेतृत्व एक प्रभाव है, जिसमें जो व्यक्ति नेता के पद पर विराजमान होता है वह अन्य व्यक्तियों को प्रभावित करता है.”
(leadership is a influence in which the person who occupies the position of leader, influences the other individuals.)

  1. लापिअर और फार्नसवर्थ ने स्पष्ट किया है कि नेतृत्व में दो पक्ष होते है- एक नेता जो नेतृत्व करता है और दूसरा समूह के सदस्य जो नेतृत्व स्वीकार करते है. इनमें समूह के सदस्य नेता के व्यवहार से प्रभावित होते है और नेता समूह के सदस्यों से प्रभावित होता है. परन्तु समूह के सदस्य नेता के व्यवहार से बहुत अधिक प्रभावित होते है जबकि नेता समूह के सदस्यों से कम प्रभावित होता है. उन्होंने इसी आधार पर leadership की परिभाषा दी है:-

“नेतृत्व वह व्यवहार है जो दूसरे व्यक्तियों के व्यवहार को उससे कही अधिक प्रभावित करता है जितना कि उनका व्यवहार नेता को प्रभावित करता है.”
(leadership is a behavior that affects the behavior of other people more than their behavior affect that of the leader.)

यदि आप ध्यान से सोचें तो आपको पता चलेगा कि-

नेतृत्व किसी समूह में निरंतर चलने वाली वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा समूह का नेता समूह का मार्ग-दर्शन करता है. समूह के सदस्यों को उद्देश्य या उद्देश्यों की प्राप्ति की ओर अग्रसर करता है और साथ ही समूह को बांधें रखता है और उस पर नियन्त्रण रखता है.”

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types of leadership in hindi नेतृत्व के प्रकार

नेतृत्व के अनेक प्रकार होते है मेरी पार्कर फोलेट (M.P Follet)  के नेतृत्व को तीन भागो में विभाजित किया है –

1> पद पर आधारित नेतृत्व :- जब किसी किसी समूह में किसी व्यक्ति को समूह के सदस्यों से कार्य लेने का उतरदायित्व सौंपा जाता है और वह समूह सदस्यों को कार्य करने की ओर प्रवृत करता है , उनके कार्यों को सही दिशा देता है और उनके कार्यों से सम्पादन सही ढंग से करता है तो इसे नेतृत्व को पद आधारित नेतृत्व कहते है इस नेतृत्व में पद पर आसीन व्यक्ति नेता होता है और वह अपने अधीन कार्यरत व्यक्तियों को आदेश देता है ,उनका निर्देशन करता है और साथ ही उन पर नियन्त्रण रखता है!

2> व्यक्तित्व पर आधारित नेतृत्व :- जब किसी समूह में कोई व्यक्ति अपने व्यक्तित्व और कार्यों के आधार पर नेतृत्व करता है और वह समूह के सदस्यों को उदेश्यों की प्राप्ति के लिये क्रियाशील करता है , उनका मार्गदर्शन करता है, तो ऐसे नेतृत्व को व्यक्तिगत आधारित नेतृत्व कहते है इस प्रकार के नेतृत्व  में नेता समूह के सदस्यों को उदेश्यों की प्राप्ति के क्रियाशील करता है और उनका मार्गदर्शन करता है इस नेतृत्व में सदस्य अपनी इच्छा से कार्य करते है और लगन के साथ करते हैं!

3> कार्य एवं योग्यता पर आधारित नेतृत्व :- जब कोई व्यक्ति किसी क्षेत्र विशेष में विशिष्ट ज्ञान होने के आधार पर उस क्षेत्र विशेष में कार्यरत व्यक्तियों का दिशा निर्देशन करता है ,तो इसे ज्ञान एवं कार्य के आधार पर आधारित नेतृत्व कहते है

इस प्रकार के नेतृत्व में क्षेत्र विशेष ज्ञान के साथ चिन्तन एवं तर्क का बड़ा महत्व होता है इसमे नेता और समूह के सदस्यों के बीच सहयोगपूर्ण सम्बन्ध होते है

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नेतृत्व की शैलियां (styles of leadership in hindi)

किसी समूह में उदेश्य की प्राप्ति के लिए नेता किसी रूप में कार्य करता है और समूह के सदस्य किस रूप में कार्य करते है, कार्य करने के इन तरीकों को नेतृत्व की शैली कहते है, नेतृत्व की अनेक शैलियाँ है –

(white lippitt and Livin ) ने समूह में नेता के निर्णय लेने और कार्य करने के आधार पर नेतृत्व की शैलियों को तीन भागों में विभाजित किया है-

  1. सत्ताधारी नेतृत्व (authoritarian leadership) :- इस शैली में समूह के नेता को निर्णय लेने और निर्णय के अनुसार कार्य के संचालन करने का पूर्ण अधिकार होता है वह स्वयं निर्णय लेता है और अपने इच्छानुसार कार्य का संचालन करता है इस प्रकार इसमें अधिकारों का केन्द्रीकरण (centralization) होता है यह नेतृत्व कार्य उन्मुखी (task oriented) होता है इस में उदेश्य की प्राप्ति किस प्रकार की जा सकती है ,इस पर अधिक ध्यान दिया जाता है इसमें समूह के सभी सदस्य नेता के आदेशों के अनुसार कार्य करते है.

इस शैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है की इसमें समूह में व्यवस्था एवं अनुशासन रहता है , समूह के सभी सदस्य अपना अपना कार्य सही ढंग से करते है और समूह के उदेश्यों की प्राप्ति करते है!

दूसरी ओर इसकी सबसे बड़ी कमी यह है की यदि समूह में नेता का निर्णय गलत हुआ तो उदेश्य की प्राप्ति के स्थान पर असफलता ही प्राप्त होता है ,

इसकी दूसरी कमी यह है की इसमें समूह के सदस्य अधीनता का अनुभव करते है और उनका मनोबल गिर जाता है

तीसरी कमी यह है की इसमें नेता की अनुपस्थिति में शिथिलता आ जाती है और नेता की मृत्यु के बाद तो समूह  बिखर जाता है !

  1. लोकतन्त्रीय शैली (democratic style) :- इस शैली में नेता समूह के राय से निर्णय लेता है समूह के सदस्यों की राय से योजना बनता है और समूह के सदस्यों के सहयोग से उदेश्यों की प्राप्ति की जाती है यह नेतृत्व सदस्य उन्मुखी (members oriented) होता है ,इस शैली में अधिकारों का विकेंद्रीकरण (decentralization) होता है, बड़े आकार के समूह के साथ नेता के साथ उपनेता होते है और वरिष्ठ कार्यकर्ता होते है जिन सब के सहयोग से समूह के सदस्य आगे बढ़ते है

इस शैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि समूह के सभी सदस्य किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त होते है उनका मनोबल ऊँचा होता है, वह अपने उतरदायित्व को समझते है, स्वेच्छा से कार्य करते है, और उदेश्य की प्राप्ति करते है

इस शैली में कुछ कमियां भी है बड़े समूह में ना तो सभी सदस्यों की राय ली जाती है और ना सभी की राय मानी जा सकती है राय की भिन्नता के कारण सभी सदस्य एकजुट नही हो पते और कभी कभी  उदेश्य की प्राप्ति में बाधा पड़ती है

  1. अनहस्तक्षेपी शैली (laissez-fair style) :- नेतृत्व की इस शैली में नेता समूह के सदस्यों के कार्यों में हस्तक्षेप नही करता, समूह के सभी सदस्य उदेश्यों की प्राप्ति के लिए समूह की परिपाटी के अनुसार के कार्य करते है उन पर नेता का न्यूनतम नियन्त्रण होता है.

प्रबुद्ध व्यक्तियों के छोटे समूह में यह शैली कारगर होती है प्रथमत: इसलिए कि प्रबुद्ध व्यक्तियों के आत्मसम्मान की रक्षा होती है दूसरा इसलिए कि उन पर विश्वास किया जाता है उनकी निष्ठां पर विश्वास किया जाता है और उनकी योग्यता पर विश्वास किया जाता है परिणामत: वह अपने उतरदायित्व का निर्वाह ईमानदारी से करते है और पूरी लगन से करते है

परन्तु यह शैली सामान्य व्यक्तियों के छोटे बड़े किसी भी समूह में कारगर नही होती. नेता का हस्तक्षेप ना होने अथवा न्यूनतम हस्तक्षेप होने से समूह में ना व्यवस्था होती है और ना ही अनुशासन और कार्य अनियंत्रित और अनिश्चित रूप से चलता है परिणामस्वरूप उदेश्य की प्राप्ति नही हो पाती !

conclusion

नेतृत्व (leadership) की तीन शैलियों सताधारी ,लोकतन्त्रीय,एवं अनहस्तक्षेपी के अपने गुण दोष है किस समूह में नेतृत्वता की किस शैली को अपनाया जाये यह समूह के स्वरूप, उदेश्यों और सदस्यों तीनों पर निर्भर करता है इसके साथ साथ इस बात पर भी निर्भर करता है की नेता किन परस्थितियों में किस शैली को अपनाता है और किस रूप में अपनाता है.

सामान्यत: रक्षा (defence) के क्षेत्र में अधिनायकवादी  शैली अधिक उपयुक्त मानी जाती है और परिवार एवं समुदाय के क्षेत्र में लोकतन्त्रीय शैली अधिक उपयुक्त मानी जाती है. चूँकि अनहस्तक्षेप शैली अपने में उपयुक्त शैली नही है परन्तु फिर भी प्रबुद्ध व्यक्तियों के समूह में यह अधिक कारगर होती है!

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