कंप्यूटर वायरस क्या है और इसके प्रकार – Computer Virus in Hindi

हेल्लो दोस्तों! आज हम इस पोस्ट में What is Computer Virus in Hindi (कंप्यूटर वायरस क्या है और इसके प्रकार) के बारें में पढेंगे. इसे बहुत ही आसान भाषा में लिखा गया है. इसे आप पूरा पढ़िए, यह आपको आसानी से समझ में आ जायेगा. तो चलिए शुरू करते हैं:-

Computer Virus in Hindi – कंप्यूटर वायरस क्या है?

  • Computer Virus एक प्रकार का कंप्यूटर प्रोग्राम होता है जो कंप्यूटर में मौजूद सारें data और files को नुकसान पहुंचाता है।

  • दूसरे शब्दों में कहें तो, “कंप्यूटर वायरस एक हानिकारक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम होता है जो कंप्यूटर के डेटा को बुरी तरह से नष्ट (destroy) कर देता है।”

  • VIRUS का पूरा नाम Vital Information Resources Under Siege (वाइटल इनफार्मेशन रिसोर्सेज अंडर सीज) होता है।

  • जब एक बार virus कंप्यूटर में आ जाता है तो यह अपने आप ही पूरे कंप्यूटर में फैल जाता है और कंप्यूटर में मौजूद सारें programs को corrupt कर देता है।

  • Virus का काम कंप्यूटर के data को चुराना, डेटा को नुकसान पहुंचाना और डेटा को modify करना होता है।

  • वायरस के पास अपनी खुद की copy को उत्पन्न करने की क्षमता होती है जिसके कारण यह एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में आसानी से फैल जाता है।

  • कंप्यूटर वायरस को self-replicating program भी कहते है क्योकि यह एक कंप्यूटर से दुसरे कंप्यूटर में अपने-आप (Automatic) फैलता है।

  • Computer Virus का मुख्य उदेश्य computer के कार्य करने की छमता को धीमा (slow) करना होता है।

  • सबसे पहले कंप्यूटर वायरस को 1971 में Robert Thomas ने विकसित किया था। जिसका नाम Creeper था।

  •  आजकल बहुत सारें Antivirus सॉफ्टवेयर उपलब्ध है जिनकी मदद से हम अपने डिवाइस या कंप्यूटर को Virus से आसानी से सुरक्षित रख सकते हैं। Antivirus हमारे computer को अच्छी तरह scan करता है और जब भी उसे कोई virus मिलता है तो वह उसे उसी समय delete कर देता है। कुछ प्रसिद्ध Antivirus है जैसे कि- Avast, QuickHeal, McAfee, और Kaspersky आदि।

Types of Computer Virus in Hindi – कंप्यूटर वायरस के प्रकार

कंप्यूटर वायरस के प्रकार नीचे दिए गये हैं:-

1Boot sector virus (बूट सेक्टर वायरस)

इस वायरस को Boot Infector, MBR और DBR Virus के नाम से भी जाना जाता है. जब कंप्यूटर को Boot किया जाता है तो तब यह virus कंप्यूटर में फैलता है।

यह कंप्यूटर के उस हिस्से को नुकसान पहुंचाता है जहाँ पर ऑपरेटिंग सिस्टम की महत्वपूर्ण जानकारी मौजूद होती है। सरल शब्दो में कहे तो Boot sector virus ऑपरेटिंग सिस्टम के हिस्से (part) को नुकसान पहुंचाता है।

यह वायरस corrupt हुई media file , इन्फेक्ट हुई स्टोरेज डिवाइस और असुरक्षित कंप्यूटर नेटवर्क के द्वारा कंप्यूटर में प्रवेश (Entry) करता है।

बूट सेक्टर वायरस के पास कंप्यूटर में मौजूद सभी प्रकार की डिस्क फाइलों को infect (संक्रमित) करने की क्षमता होती है लेकिन इसके बावजूद यूजर Antivirus का प्रयोग करके इस वायरस को सिस्टम से हटा सकता है।

2Web scripting virus (वेब स्क्रिप्टिंग वायरस)

वेब स्क्रिप्टिंग वायरस एक प्रकार का Malware है जो वेब ब्राउज़र को नुकसान पहुंचाता है। यह वायरस संक्रमित वेबसाइट और pop-ups की मदद से कंप्यूटर में फैलता है।

यह वायरस कंप्यूटर में मौजूद जानकारी को नुकसान पंहुचा सकता है , सिस्टम में मौजूद डेटा को चुरा सकता है और सिस्टम के काम करने की speed को धीमा कर सकता है।

Web Scripting Virus बिजली की रफ़्तार से कंप्यूटर में फ़ैल सकता है और यूजर को spam mail भी भेज सकता है।

Types of Web Scripting Virus in Hindi – वेब स्क्रिप्टिंग वायरस के प्रकार

यह दो प्रकार का होता है:-

  1. Non-Persistent Web Scripting Virus – इस प्रकार के virus को यूजर देख नहीं सकता और यह यूजर की जानकारी के बिना यह वायरस कंप्यूटर में attack करता है।
  2. Persistent Web Scripting Virus यह वायरस सिस्टम में लगातार Attack करता है जिसके कारण कंप्यूटर को काफी नुकसान पहुँचता है।

3Append Virus (अपेण्ड वायरस)

APPEND virus एक ऐसा वायरस होता है जो file के अंत में अपने हानिकारक code को डाल देता है।

दुसरे वायरस की तुलना में Append Virus का पता लगाना मुश्किल होता है क्योंकि यह वायरस कंप्यूटर के किसी भी हिस्से को नुकसान नहीं पहुंचाता, जिसके चलते यूजर इस बात का पता नहीं लगा पाता की यह वायरस उसके कंप्यूटर में मौजूद है।

4- Macro Virus (मैक्रो वायरस)

Macro virus एक ऐसा वायरस है जिसे macro language में लिखा जाता है। Macro language एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जो कंप्यूटर में मौजूद डेटा और फाइलों को infect (संक्रमित) करता है।

यह वायरस कंप्यूटर में तब फैलता है जब कंप्यूटर में मौजूद किसी infected documents को open किया जाता है।

यह वायरस MS Word और MS Excel जैसे प्रोग्राम के द्वारा भी फैलता है। जब भी कोई यूजर Ms Word और Ms Excel का उपयोग करके किसी फाइल को open करता है तब Macro virus के फैलने के chances ज्यादा होते है।

Macro virus के पहले वर्शन का नाम concept था जो email के द्वारा कंप्यूटर सिस्टम में फ़ैल गया था। Macro virus के इस वर्शन ने Ms Word 6.0 और Ms Word 95 जैसी फाइलों को नुकसान पंहुचा दिया था। 

5Resident Virus (रेजिडेंट वायरस)

यह एक प्रकार का वायरस है जो कंप्यूटर की primary memory मौजूद होता है जिसे हम RAM भी कहते है।

जब कोई यूजर कंप्यूटर को open करता है तो यह वायरस Active हो जाता है और कंप्यूटर में चल रही फाइलों को corrupt कर देता है।

Resident virus किसी भी कंप्यूटर के लिए Harmful (नुकसानदायक) होते है क्योकि यह पुरे कंप्यूटर को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते है।

6Multipartite Virus (मल्टीपैरटाइट वायरस)

यह वायरस कई प्रकार से कंप्यूटर में मौजूद फाइलों को Infect (संक्रमित) करता है। यह बूट सेक्टर और हार्ड ड्राइव पर executable फाइलो को नुकसान पहुंचाता है। Multipartite Virus काफी तेज गति से computer में फैलता है।

 7File Infector Virus (फ़ाइल इन्फेक्टर वायरस)

यह एक प्रकार का Malware है जो executable फाइलो (जैसे कि – .com और .exe ) को infect करता है. यह वायरस इन्फेक्टेड फाइलों के execute होने पर Active हो जाता है। इस प्रकार के वायरस Macintosh, Windows और Unix जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम को infect करता है।

8Computer worm (कंप्यूटर वोर्म)

Computer worm एक प्रकार का वायरस है लेकिन तकनीकी रूप से वायरस से अलग है। वायरस की तरह computer worm भी कंप्यूटर में फ़ैल सकता है।

इस वायरस को सिस्टम में फैलने के लिए किसी भी प्रकार के प्रोग्राम की ज़रूरत नहीं पड़ती। यह automatic (अपने-आप ही) कंप्यूटर में फैलकर फाइलों को नुकसान पंहुचा सकता है। Computer worm नेटवर्क के द्वारा कंप्यूटर में फैलता है।

9Trojan Horse (ट्रोजन हॉर्स)

यह एक प्रकार का Malware है। जब कोई यूजर कंप्यूटर में किसी नए प्रोग्राम को install करता है तब यह वायरस कंप्यूटर में प्रवेश (Enter) कर जाता है।

यह वायरस कंप्यूटर को unauthorized access प्रदान करता है। Trojan Horse सिस्टम में मौजूद फाइलों को delete कर सकता है।

10- Cavity virus ( कैविटी वायरस)

कैविटी वायरस को Spacefiller virus के नाम से भी जाना जाता है। यह वायरस फाइल के खाली हिस्से में मौजूद होता है और इस वायरस को पहचानना यूजर के लिए काफी मुश्किल होता है।

11CMOS Virus

CMOS एक प्रकार की memory chip है जो कंप्यूटर के configuration को delete और reset कर सकता है।

12Companion Virus (कम्पैनियन वायरस)

कम्पैनियन वायरस फाइलों में मौजूद होता है जो फाइलों के execute होने पर Active हो जाता है। यह वायरस hard drive फाइलों को delete करता है।

13Encrypted Virus (एन्क्रिप्टेड वायरस)

एन्क्रिप्टेड वायरस hard drive में मौजूद डेटा और फाइलों को Encrypt करता है। Encrypted Virus दो प्रकार के होते है पहला encrypted virus body और दूसरा decryptor .

14Executable Virus (एक्सीक्यूटेबल वायरस)

यह non-resident कंप्यूटर वायरस है जो executable फाइलों में मौजूद होता है। जब infected फाइलों को execute किया जाता है तब यह वायरस Active हो जाता है।

15Polymorphic Virus (पोलीमार्फिक वायरस)

Polymorphic Virus का पता लगाना Antivirus के लिए भी मुश्किल होता है। यह कंप्यूटर को प्रभावित करता है जिसकी वजह से कंप्यूटर के कार्य करने की speed (गति) कम हो जाती है।

यह वायरस Malware का इस्तेमाल करके कंप्यूटर में फैलता है।

16Rabbit Virus (रैबिट वायरस)

Rabbit Virus को fork bomb के नाम से भी जाना जाता है जो कंप्यूटर की speed को slow (धीमा) कर देता है।

17Stealth Virus (स्टील्थ वायरस)

यह एक प्रकार का hidden (छुपा हुआ) virus है जो ऑपरेटिंग सिस्टम की प्रक्रियाओं को Infect करता है। इस वायरस को पहचानना मुश्किल होता है क्योकि यह वायरस अपने आपको फाइलों और बूट सेक्टर में छुपा लेता है।

18Overwrite Virus (ओवरराईट वायरस)

यह कंप्यूटर का सबसे सरल वायरस है। यह एक प्रकार का malicious program है जो कंप्यूटर में मौजूद original program code को delete कर देता है। इस वायरस को किसी विशेष file और application को delete करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

Causes of Computer Virus in Hindi (कंप्यूटर वायरस के कारण)

कंप्यूटर में निम्नलिखित कारणों से virus आता है:-

  1. एक कंप्यूटर को दुसरे कंप्यूटर के साथ connect करने से वायरस कंप्यूटर में आ सकता है।
  2. एक कंप्यूटर से दुसरे कंप्यूटर में डेटा ट्रांसफर करते वक़्त भी वायरस computer में प्रवेश कर सकता है।
  3. इंटरनेट के द्वारा भी यह computer में प्रेवश कर सकता है।
  4. Computer में प्रोग्राम और एप्लीकेशन download करते वक़्त वायरस फ़ैल सकता है।
  5. ब्राउज़र का इस्तेमाल करते समय कई सारे वायरस computer में प्रवेश कर सकते है।

How prevent computer virus in Hindi (कंप्यूटर वायरस को कैसे रोकें?)

1- कंप्यूटर को वायरस से बचाने के लिए हमे कंप्यूटर को लगातार update करना होगा। क्योकि जब कंप्यूटर update होता है तो उसमे नए Feature Add हो जाते है जो सिस्टम को वायरस से सुरक्षित करते है।

2- कंप्यूटर में Antivirus का प्रयोग करे। क्योकि Antivirus कंप्यूटर में मौजूद वायरस को scan करके उसे delete कर देता है।

3- यदि यूजर कंप्यूटर में डेटा और फाइलों को secure (सुरक्षित) करने के लिए कमजोर password का इस्तेमाल करता है तो वायरस आसानी से डेटा को चुरा सकता है और फ़ैल सकता है। इसलिए यूजर को हमेशा strong password का इस्तेमाल करना चाहिए।

4- कंप्यूटर में Firewall का इस्तेमाल करे। यह भी एक प्रकार का Antivirus है जो Malware जैसे वायरस से कंप्यूटर को protect करता है। दुसरे Antivirus की तुलना में फ़ायरवॉल बेहतर तरीके से कंप्यूटर को वायरस से protect करते है।

5- कंप्यूटर को वायरस से protect करने के लिए Popup Blocker का इस्तेमाल करना चाहिए। जब यूजर किसी browser को browse कर रहा होता है तो उस समय कंप्यूटर में वायरस के प्रवेश होने के chances ज्यादा होते है इसलिए यूजर popup Blocker का इस्तेमाल करता है जिससे वायरस कंप्यूटर में प्रवेश नहीं हो पाता।

Symptoms of Computer Virus in Hindi (कंप्यूटर वायरस के लक्षण)

कंप्यूटर वायरस को नीचे दिए गये लक्षणों के आधार पर पहचाना जा सकता है:-

1– कंप्यूटर की speed का धीमा होना

यदि यूजर को कंप्यूटर को open और close करने में ज्यादा समय का वक़्त लग रहा है या computer में मौजूद फाइल, सॉफ्टवेयर और प्रोग्राम को open होने में ज्यादा समय का वक़्त लग रहा है। तो कंप्यूटर में वायरस हो सकता है जिसने कंप्यूटर के कार्य करने की speed को कम कर दिया है।

2– हार्ड ड्राइव में दिक्कत

यदि यूजर हार्ड-ड्राइव का इस्तेमाल नहीं कर रहे हों फिर भी उसमें यदि कोई गतिविधि हो रही हो और हार्ड-ड्राइव में अपने-आप ही बदलाव हो रहे हों तो कंप्यूटर में वायरस हो सकता है.

3– कंप्यूटर का लगतार crash होना

जब यूजर कंप्यूटर में गेम खेल रहा होता है या वीडियो देख रहा होता है तो उसे कंप्यूटर में नीली कलर की screen दिखाई देती है जो सिस्टम के crash होने के कारण दिखती है। यह भी एक प्रकार का वायरस का symptom है।

4– अनचाहा प्रोग्राम

जब यूजर अपने कंप्यूटर को open करता है तो कुछ प्रोग्राम अपने-आप open हो जाते है जिन्हे Unwanted program (अनचाहा प्रोग्राम) कहते है। यह भी वायरस के कारण होता है.

5 असामान्य गतिविधियां

इस स्थिति में कंप्यूटर अचनाक से बंद हो जाता है, ऑपरेटिंग सिस्टम सही तरीके से काम नहीं कर पाता, software और hardware में खराबी आ जाती है।

6– सुरक्षा में गडबडी

इस स्थिति में Antivirus कंप्यूटर में मौजूद वायरस के कारण सही तरीके से काम नहीं कर पाता।

7– नेटवर्क की समस्या

इसमें यूजर को नेटवर्क से सबंधित समस्याओ का सामना करना पड़ता है। जैसे (इंटरनेट काम ना करना , इंटरनेट slow चलना और सिस्टम को इंटरनेट से connect करने में समस्या का सामना करना)

8– डिस्प्ले की परेशानी

जब कंप्यूटर की display में अलग अलग प्रकार के रंग दिखाई देते है उस समस्या को Display problem कहते है। यह भी वायरस का एक संकेत है।

9- Dialog Box

इस स्थिति में कंप्यूटर की स्क्रीन में कई सारे dialog box  दिखने लगते है। यह एक प्रकार का Box होता है जिसका प्रयोग यूजर से input प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

10– प्रिंटर की समस्या

इस स्थिति में printer कमांड के बिना documents को print करने लगता है।

History of Computer Virus in Hindi (कंप्यूटर वायरस का इतिहास)

  • कंप्यूटर वायरस को सबसे पहले 1971 में Robert Thomas के द्वारा डिज़ाइन किया गया था। Robert Thomas एक इंजीनियर थे जो उस समय BBN Technologies में काम करते थे।
  • जिस वायरस को Robert Thomas के द्वारा डिज़ाइन किया गया था उसका नाम Creeper virus था। यह वायरस एक प्रकार का प्रोग्राम था जिसे computer को संक्रमित करने के लिए डिज़ाइन किया गया था।
  • वर्ष 1982 में Richard Skrenta के द्वारा Elk Cloner वायरस को डिज़ाइन किया गया था जो ऑपरेटिंग सिस्टम को infect करता था। उस समय इन सभी वायरस को Malicious Programs के नाम से भी जाना जाता था।
  • लेकिन वर्ष 1983 में Fred Cohen के द्वारा इन सभी Malicious Programs को computer virus कहां गया। तब से इन प्रोग्रामो को computer virus के नाम से जाना जाने लगा।

Virus और worm के बीच अंतर

Computer VirusWorm
कंप्यूटर वायरस एक हानिकारक code होता है जो नेटवर्क के माध्यम से अलग-अलग computers में फैलता है.यह malware का एक रूप है जो खुद की copy बना लेता है और network के माध्यम से एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में फैल जाता है.
इसका मुख्य उद्देश्य information को modify करना होता है.इसका उद्देश्य कंप्यूटर के resources को फालतू में इस्तेमाल करना होता है.
इसे एक computer से दूसरे computer में फैलने के लिए host की आवश्यकता नहीं होती.इसे फैलने के लिए host की जरूरत होती है.
यह ज्यादा हानिकारक होता है.यह कम हानिकारक होता है.
इसकी फैलने की speed बहुत worm से कम है.इसकी फैलने की गति ज्यादा होती है.
Computer Virus क्या है?

यह एक malicious code है जिसका इस्तेमाल information और data को बदलने के लिए किया जाता है.

कंप्यूटर वायरस के कितने प्रकार होते है?

इसके बहुत सारें प्रकार होते हैं जैसे कि – Boot sector, Direct Action, Polymorphic, Macro, Overwrite, और File Infector आदि.

Reference:- https://www.proofpoint.com/us/threat-reference/computer-virus

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