Multiplexing in Hindi & Types of Multiplexing in Hindi

हेल्लो दोस्तों! आज हम इस आर्टिकल में Multiplexing in Hindi & Types of Multiplexing in Hindi के बारें में पढेंगे. इसे बहुत ही आसान भाषा में लिखा गया है. इसे आप पूरा पढ़िए, यह आपको आसानी से समझ में आ जायेगा. तो चलिए शुरू करते हैं:-

Multiplexing in Hindi – मल्टीप्लेक्सिंग क्या है?

  • Multiplexing एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बहुत सारें सिग्नलों को आपस में मिलाकर केवल एक सिग्नल बनाया जाता है और फिर इस सिग्नल को ट्रांसफर कर दिया जाता है।
  • Multiplexing एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा बहुत सारें सिग्नलों को सिर्फ एक सिग्नल में बदल दिया जाता है। और Multiplexing की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जिस हार्डवेयर का उपयोग किया जाता है उसे हम Multiplexer कहते है।”
  • सरल शब्दो में कहे तो “Multiplexing एक प्रकार की तकनीक है जिसका उपयोग एक ही माध्यम (medium) से सिग्नल को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।”
  • जब भी बहुत सारें signals को एक माध्यम (medium) से ट्रांसफर किया जाता है तो signals के बीच में टकराव (collision) होने की संभावना होती है। Multiplexing का इस्तेमाल इस collision (टकराव) से बचने के लिए किया जाता है।
  • Multiplexing में, यदि किसी analog signal को मल्टीप्लेक्स किया जाता है, तो इसे हम एनालॉग मल्टीप्लेक्सिंग कहते है। इसी तरह यदि डिजिटल सिग्नल को मल्टीप्लेक्स किया जाता है, तो इसे हम डिजिटल मल्टीप्लेक्सिंग कहते है।
  • मल्टीप्लेक्सिंग तकनीक का इस्तेमाल टेलीकम्युनिकेशन और कंप्यूटर नेटवर्क में किया जाता है। टेलीकम्युनिकेशन में इसका इस्तेमाल टेलीफोन कॉल करने के लिए किया जाता है।
  • दूसरी तकनीकों की तुलना में मल्टीप्लेक्सिंग काफी सस्ती तकनीक है। यह तकनीक एक कम्युनिकेशन चैनल को कई अलग अलग चैनल में विभाजित (divide) करती है और प्रत्येक चैनल को एक अलग मैसेज या डेटा स्ट्रीम को ट्रांसफर करने की अनुमति (permission) देती है।
  • इस तकनीक का अविष्कार 1870 में हुआ था जिसका उपयोग वर्तमान समय (present time) में संचार (communication) के लिए किया जाता है।
  • इस तकनीक का उपयोग करके वीडियो और ऑडियो फॉर्मेट के डेटा को ट्रांसफर किया जा सकता है।
  • Multiplexing की विपरीत की प्रक्रिया को Demultiplexing कहा जाता है।
multiplexing in hindi
मल्टीप्लेक्सिंग का चित्र

इसे भी पढ़े –

Types of Multiplexing in Hindi – मल्टीप्लेक्सिंग के प्रकार

इसके प्रमुख रूप से तीन प्रकार होते हैं जो कि नीचे दिए गए हैं –

TYPES OF MULTIPLEXING IN HINDI
  1. FDM
  2. TDM
  3. WDM

FDM in Hindi – एफडीएम क्या है?

FDM का पूरा नाम Frequency division multiplexing (फ्रीक्वेंसी डिवीज़न मल्टीप्लेक्सिंग) है। यह multiplexing की सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक है।

FDM एक ऐसी तकनीक है जिसमें अलग – अलग फ्रीक्वेंसी के सिग्नलों को आपस में मिलाकर एक सिग्नल बनाया जाता है।

FDM में signals को एक ही time (समय) में ट्रांसमिट किया जाता है लेकिन इन signals की फ्रीक्वेंसी अलग अलग होती है।

FDM एक एनालॉग तकनीक है जिसमे ट्रांसमिशन मीडियम की bandwidth को कई चैनल में divide (विभाजित) किया जाता है।

इस तकनीक का इस्तेमाल रेडियो और टेलीविजन के ट्रांसमिशन में किया जाता है।

इस तकनीक की शाखा (branch) का नाम orthogonal FDM है जो subchannel फ्रीक्वेंसी को एक साथ ट्रांसफर करती है। इसमें modulation तकनीक के माध्यम से input signals को फ्रीक्वेंसी बैंड में ट्रांसफर किया जाता है।

fdm in hindi
FDM का चित्र

Advantages of FDM in Hindi – FDM के फायदे

1- FDM की प्रक्रिया बहुत सरल होती है।

2- इसमें modulation का इस्तेमाल किया जाता है।

3- इसका इस्तेमाल analog signals के लिए किया जाता है।

4- इसमें एक साथ बड़ी संख्या में बहुत सारे signals को भेजा जा सकता है।

5- इसमें सेन्डर और रिसीवर के बिच किसी प्रकार के synchronization की आवश्यकता नहीं पड़ती।

6- यह तकनीक सस्ती है।

7- यह विश्वशनीय (reliable) है।

Disadvantages of FDM in Hindi – FDM के नुकसान

1- इसमें बड़ी संख्या में modulator की आवश्यकता पड़ती है।

2- FDM तकनीक का उपयोग करने के लिए हाई बैंडविड्थ चैनल की आवश्यकता पड़ती है।

3- इसे TDM की तुलना में ज्यादा हार्डवेयर की आवश्यकता पड़ती है।

4- इसका उपयोग केवल तभी किया जाता है जब कम गति (speed) वाले चैनलों की आवश्यकता पड़ती है।

5- FDM सिस्टम काफी महंगा होता है।

Application of FDM in Hindi – FDM के अनुप्रयोग

इसका इस्तेमाल निम्नलिखित जगहों पर किया जाता है।

1- FDM का उपयोग रेडियो और टेलीविजन ब्राडकास्टिंग में किया जाता है।

2- इसका इस्तेमाल टेलीफोन सिस्टम में किया जाता है।

3- इसका इस्तेमाल FM और AM ब्राडकास्टिंग के लिए किया जाता है।

4- इसका उपयोग सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम में भी किया जाता है।

5- यह तकनीक सैटेलाइट कम्युनिकेशन में डेटा को कई चैनल में ट्रांसफर करने में मदद करती है।

6- इसका उपयोग ब्रॉडबैंड कनेक्शन के लिए भी किया जाता है।

7- यह मल्टीमीडिया डेटा जैसे (वीडियो , ऑडियो और इमेज) को ट्रांसफर करने में मदद करती है।

8- पुराने समय में FDM का उपयोग सेलुलर टेलीफोन सिस्टम में किया जाता था।

TDM in Hindi – टीडीएम क्या है?

इसका पूरा नाम Time division multiplexing (टाइम डिवीज़न मल्टीप्लेक्सिंग) है। यह एक प्रकार की डिजिटल तकनीक है जिसका इस्तेमाल डिजिटल सिग्नल को एक ही सिग्नल में बदलने के लिए किया जाता है।

FDM में signals को एक ही time (समय) में ट्रांसमिट किया जाता है लेकिन इन signals की फ्रीक्वेंसी अलग अलग होती है। परंतु TDM में signals की फ्रीक्वेंसी एक ही होती है लेकिन इन signals को अलग अलग time में ट्रांसमिट किया जाता है।

इस तकनीक में डेटा को एक साथ ट्रांसफर नहीं किया जाता बल्कि एक एक करके sequence (क्रम) से ट्रांसफर किया जाता है। इसमें बैंडविड्थ को ट्रांसफर करने के बजाय समय को ट्रांसफर किया जाता है। इसके दो प्रकार होते है जिन्हे निचे विस्तार से समझाया गया है।

TDM in Hindi
TDM का चित्र

Types of TDM in Hindi – टीडीएम के प्रकार

इसके दो प्रकार होते है:-

1- Synchronous TDM

Synchronous TDM एक ऐसी तकनीक है जिसमें सभी device को पहले से ही time slot दे दिया जाता है। इसमें उन devices को भी time slot दे दिया जाता है जिनमें कोई भी data नही होता।

Synchronous TDM में time slot को frames के रूप में ट्रांसमिट किया जाता है। यदि डिवाइस के पास कोई data नही है तो empty slot ट्रांसमिट किया जाता है।

कुछ ऐसे Synchronous TDM है जो काफी लोकप्रिय है जैसे :- T-1 मल्टीप्लेक्सिंग, ISDN मल्टीप्लेक्सिंग और SONET मल्टीप्लेक्सिंग।

2- Asynchronous TDM

Asynchronous TDM एक ऐसी तकनीक है जिसमें सभी device को time slot नही दिया जाता है। इसमें सिर्फ उन्ही डिवाइस को time slot दिया जाता है जिनमें data होता है।

Asynchronous TDM को Statistical TDM के नाम से भी जाना जाता है। यह synchronous TDM से अच्छी तकनीक है क्योंकि इसमें synchronous TDM की तरह time slot बर्बाद नही होता।

Advantages of TDM in Hindi – टीडीएम के फायदे

1- यह FDM की तुलना में अधिक (लचीला) flexible होता है।

2- इसमें डेटा तेज गति से ट्रांसफर होता है।

3- इसमें बहुत कम हार्डवेयर की आवश्यकता पड़ती है।

4- यह FDM की तुलना में कम जटील (complex) है।

5- TDM का इस्तेमाल मुख्य रूप से डिजिटल सिग्नल के लिए किया जाता है लेकिन इसका इस्तेमाल एनालॉग सिग्नल के लिए भी किया जा सकता है ,

6- इसे किसी प्रकार के carrier wave और carrier signal की आवश्यकता नहीं पड़ती।

Disadvantages of TDM in Hindi – टीडीएम के नुकसान

1- इसे synchronization की आवश्यकता पड़ती है।

2- इसे address information और buffer की आवश्यकता पड़ती है।

Applications of TDM in Hindi – टीडीएम के अनुप्रयोग

इसका इस्तेमाल निम्नलिखित जगहों पर किया जाता है –

1- TDM का उपयोग डिजिटल ऑडियो मिक्सिंग सिस्टम में किया जाता है।

2- इसका इस्तेमाल PCM (पल्स कोड मॉड्यूलेशन) ट्रांसमिशन सिस्टम में किया जाता है।

3- इसका इस्तेमाल ऑप्टिकल डेटा ट्रांसमिशन सिस्टम या ऑप्टिकल फाइबर संचार में किया जाता है।

4- इस तकनीक का इस्तेमाल SONET (सिंक्रोनस ऑप्टिकल नेटवर्किंग) में किया जाता है।

5- इसका इस्तेमाल लैंडलाइन फोन सिस्टम में भी किया जा सकता है।

6- TDM का उपयोग हाफ डुप्लेक्स कम्युनिकेशन सिस्टम में किया जाता है।

7- इसका इस्तेमाल ISDN (इंटीग्रेटेड सर्विस डिजिटल नेटवर्क) में किया जाता है।

8- इसका इस्तेमाल PSTN (पब्लिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क) में भी किया जा सकता है।

WDM in Hindi – WDM क्या है?

WDM का पूरा नाम Wavelength Division Multiplexing (वेवलेंथ डिवीजन मल्टीप्लेक्सिंग) है। इस तकनीक का इस्तेमाल फाइबर की क्षमता को बढ़ाने के लिए फाइबर ऑप्टिक पर किया जाता है।

यह एक एनालॉग मल्टीप्लेक्सिंग तकनीक है जो FDM के समान होती है। इसमें मल्टीप्लेक्सर के माध्यम से ऑप्टिकल सिग्नल को मिलाकर प्रकाश का एक बड़ा band बनाया जाता है।

WDM in Hindi

Advantages of WDM in Hindi – WDM के फायदे

1- WDM हाई बैंडविड्थ प्रदान करता है।

2- यह विश्वनीय (reliable) है।

3- यह एक सुरक्षित तकनीक है।

4- इसे apply करना आसान है।

5- इसमें reconfigure करना आसान है।

Disadvantages of WDM in Hindi – WDM के नुकसान

1- इसमें optical component को जोड़ा जाता है जिसके कारण सिस्टम की लागत बढ़ जाती है।

2- यह scalable नहीं है।

3- इसमें सिग्नल बहुत करीब (close) नहीं हो सकते।

Applications of WDM in Hindi – WDM के अनुप्रयोग

1- WDM का उपयोग SONET नेटवर्क में किया जाता है।

2- इसका इस्तेमाल ऑप्टिकल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में किया जाता है।

3- इसका इस्तेमाल लोकल एक्सचेंज नेटवर्क में किया जाता है।

4- इसका इस्तेमाल केबल की छमता को बढ़ाने और लागत को कम करने के लिए किया जाता है।

5- इसका इस्तेमाल सिग्नल को ट्रांसफर करने के लिए भी किया जाता है।

History of Multiplexing in Hindi – मल्टीप्लेक्सिंग का इतिहास

  • Multiplexing की शुरुआत 1870 के दशक में हुई थी।
  • इस तकनीक का अविष्कार 1910 में George Owen Squier के द्वारा किया गया था।
  • उस समय इस तकनीक का इस्तेमाल संचार (telecommunications) के लिए किया जाता था जिसमे एक ही तार के माध्यम से कई टेलीफोन कॉल किए जाते हैं।
  • वर्तमान में मल्टीप्लेक्सिंग का इस्तेमाल संचार (communication) के उदेस्य के लिए किया जाता है।

Difference Between Multiplexer & Demultiplexer in Hindi

MultiplexerDemultiplexer
यह विभिन्न प्रकार के sources से डिजिटल डेटा को सिंगल सोर्स में प्रोसेस करता है।यह एक सोर्स से डिजिटल डेटा को प्राप्त करता है और इसे कई sources में बदल देता है।
इसे डेटा सेलेक्टर (data selector) भी कहते है।इसे डेटा डिस्ट्रीब्यूटर (data distributer) कहते है।
यह एक digital switch है।यह एक digital circuit है।
यह डेटा का चयन (select) करता है।यह डेटा को डिस्ट्रीब्यूट करता है।
इसमें n डेटा इनपुट होता है।इसमें single डेटा इनपुट होता है।
इसमें single डेटा आउटपुट होता है।इसमें n डेटा आउटपुट होता है।
इसका उपयोग ट्रांसमिटर के अंत में किया जाता है।इसका उपयोग रिसीवर के अंत में किया जाता है।

Exam में पूछे जाने वाले प्रश्न

Multiplexing क्या है?

यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बहुत सारें सिग्नलों को आपस में मिलाकर केवल एक सिग्नल बनाया जाता है और फिर इस सिग्नल को ट्रांसफर कर दिया जाता है.

मल्टीप्लेक्सिंग के कितने प्रकार होते है?

इसके तीन प्रकार होते है TDM, FDM, और WDM.

Reference:https://www.javatpoint.com/multiplexing-in-computer-network

निवेदन:- अगर आपके लिए (Multiplexing in Hindi & Types of Multiplexing in Hindi) का यह पोस्ट उपयोगी रहा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ अवश्य share कीजिये. और आपके जो भी questions हो उन्हें नीचे comment करके बताइए. धन्यवाद.

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