Teesri Kasam Book PDF – तीसरी कसम

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हिंदी साहित्य की दुनिया में अगर किसी लेखक ने गाँव, कस्बे और आम लोगों की ज़िंदगी को असली रूप में दिखाया है तो वह हैं फणीश्वरनाथ ‘रेणु’। उनकी रचनाएँ जमीन से जुड़ी हुई हैं और उनमें लोक-संस्कृति की खुशबू आती है। इन्हीं रचनाओं में से एक है “तीसरी कसम”, जो आज भी पाठकों के दिल को छूती है।

Teesri Kasam की पृष्ठभूमि

“तीसरी कसम” असल में एक short story है जिसे बाद में फ़िल्म का रूप भी दिया गया। इस कहानी का आधार बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाँव हैं। रेणु जी ने इसमें simple characters के ज़रिए life की गहरी बातें समझाई हैं।

कहानी का नायक है हीरामन – एक साधारण बैलगाड़ी वाला। उसका जीवन struggles और simplicity से भरा हुआ है। कहानी में तीन कसमें (promises) उसका जीवन बदल देती हैं।

कहानी का सारांश (Summary)

पहली कसम

हीरामन एक बार तस्करों का सामान ढोता है। जब उसे पता चलता है कि यह ग़ैर-कानूनी काम है, तो वह कसम खाता है कि अब कभी smuggling का सामान नहीं ढोएगा।

दूसरी कसम

दूसरी बार वह बांस की लदनी ढोता है। उन बांसों की वजह से उसके बैलों की पीठ छिल जाती है। यह देखकर उसका दिल टूट जाता है और वह कसम खाता है कि अब कभी बैलों को तकलीफ़ देने वाला सामान नहीं ढोएगा।

तीसरी कसम

सबसे खास है तीसरी कसम। हीरामन की मुलाक़ात होती है हीराबाई से, जो एक nautanki dancer है। हीरामन उससे बेहद प्रभावित होता है। दोनों के बीच एक emotional bond बनता है। लेकिन हीरामन समझ जाता है कि उसकी दुनिया और हीराबाई की दुनिया बिल्कुल अलग हैं। इसलिए वह कसम खाता है कि अब कभी किसी nautanki वाली औरत को अपनी गाड़ी पर नहीं बैठाएगा। यही है “तीसरी कसम”

कहानी की खास बातें

  1. सादगी (Simplicity):
    कहानी बहुत साधारण पात्रों पर आधारित है लेकिन इनके ज़रिए बड़े messages दिए गए हैं।
  2. ग्रामीण संस्कृति (Rural Culture):
    इसमें गाँव का जीवन, मेले, nautanki, लोगों की बोली और उनके emotions बड़ी खूबसूरती से दिखाए गए हैं।
  3. भावनात्मक गहराई (Emotional Depth):
    हीरामन और हीराबाई का रिश्ता platonic होते हुए भी बहुत touching है।
  4. मानवता का संदेश (Message of Humanity):
    कहानी सिखाती है कि इंसान को अपने principles से कभी समझौता नहीं करना चाहिए।

तीसरी कसम और फ़िल्म

इस कहानी पर 1966 में “तीसरी कसम” फ़िल्म बनी, जिसका निर्देशन बासु भट्टाचार्य ने किया और निर्माण शैलेंद्र ने किया।

  • हीरामन का किरदार निभाया था राज कपूर ने।
  • हीराबाई बनी थीं वहीदा रहमान

यह फ़िल्म भले ही commercially ज़्यादा successful नहीं हुई थी, लेकिन आज इसे एक classic माना जाता है।

फ़िल्म ने कहानी को और popular बना दिया और इसे नए readers तक पहुँचाया।

Teesri Kasam PDF Book FAQs

1. तीसरी कसम के लेखक कौन हैं?

इस किताब के लेखक हैं फणीश्वरनाथ ‘रेणु’, जो आंचलिक कथाकार के रूप में प्रसिद्ध हैं।

2. तीसरी कसम किस प्रकार की कहानी है?

यह एक short story है जो ग्रामीण जीवन, भावनाओं और मानवीय रिश्तों को दर्शाती है।

3. कहानी का मुख्य पात्र कौन है?

मुख्य पात्र है हीरामन, जो बैलगाड़ी चलाने वाला एक सीधा-सादा इंसान है।

4. ‘तीसरी कसम’ नाम क्यों रखा गया है?

कहानी में हीरामन तीन कसमें खाता है। तीसरी कसम उसकी जिंदगी की सबसे अहम turning point बनती है, इसलिए इसका नाम तीसरी कसम रखा गया।

5. क्या इस कहानी पर फ़िल्म बनी है?

हाँ, 1966 में राज कपूर और वहीदा रहमान के साथ “तीसरी कसम” नाम की फ़िल्म बनी थी।

6. इस कहानी का moral क्या है?

यह सिखाती है कि इंसान को अपने सिद्धांतों (principles) और आदर्शों (values) से समझौता नहीं करना चाहिए।

8. क्या यह कहानी syllabus में शामिल है?

हाँ, हिंदी साहित्य और school/college syllabus में अक्सर तीसरी कसम पढ़ाई जाती है।

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